प्रेम अयनी श्री राधिका सब्जेक्टिव क्वेश्चन Class 10th hindi
प्रेम अयनी श्री राधिका सब्जेक्टिव Prem ayani shree radhika subjective
इस लेख में Prem ayani shree radhika subjective question - प्रेम अयनी श्री राधिका सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है।
यदि आप भी कक्षा दसवीं में है और बिहार बोर्ड परीक्षा को देने वाले हैं तो इस लेख को एक बार जरुर पढ़ें।
क्योंकि इस लेख में कक्षा दसवीं हिंदी गोधूली भाग 2 के काव्यखण्ड पाठ - 2 Prem ayani shree radhika ka subjective question - प्रेम अयनी श्री राधिका का सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है। जो आपके बोर्ड परीक्षा में पूछे जा सकते है तो अपने तैयारी को बेहतर बनाने के लिए नीचे दिए गए सभी प्रश्नों को अवश्य पढ़ें।
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| Prem ayani shree radhika subjective question |
Bihar board class 10th hindi subjective question 2023
1. कवि ने माली-मालिन किसे और क्यों कहा है?
उत्तर: कवि ने माली-मालिन राधा और कृष्ण को कहा है, क्योंकि दोनो प्रेम रुपी वाटिका के संरक्षक हैं।
2. द्वितीय दोहे हा काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें -
उत्तर: दूसरे दोहे में कवि रसखान की अनुपम भक्ति प्रकट हुई है। इसमें श्रीकृष्ण की भक्ति मे कवि अपना सबकुछ न्योछावर करने को तैयार है। अलंकार के अनुप्रयास प्रयोग से दोहा का सौंदर्य उत्कर्ष पर पहुँच गया है।
3. कृष्ण को चौर क्यों कहा गया है? कवि का अभिप्राय स्पष्ट करे।
उत्तर: भक्त हो शीघ्र ही अपनी ओर आकर्षित करने के कारण कवि उन्हे चोर (चितचोर) कहा है। अभिप्राय यह कि भक्त जब श्रीकृष्ण की भक्ति मे लीन होते हैं तो तुरंत उनका चित कृष्ण मे लग जाता है। इसलिए कवि श्रीकृष्ण को चितचोर भी कहा है।
4. सवैये मे कवि की कैसी आकांक्षा प्रकट होती है भावार्थ बताते हुए स्पष्ट करें।
उत्तर: सवैये मे कवि अपनी आकांक्षा प्रकट करते हुए कहता है कि श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए हमे करोड़ों स्वर्ग त्यागना पड़े तो मैं त्याग सकता हूं।
5. व्याख्या करें -
(क) मन पावन चितचोर, पलक ओट नहिं करि सकौ। उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तिका गोधूली, भाग-2, के काव्यखण्ड के कविता "प्रेम अग्रनि श्री राधिका" से ली गई है। जिसके कवि रसखान जी है।
इन पंक्तियों के माध्यम से कवि राधा - कृष्ण की छवि को प्रेम का खान कहकर अपनी भक्ति निवेदित करता है। इसके माध्यम से कवि कहता है कि श्री कृष्ण मन को पवित्र करने वाले एवं चित को चुराने वाले है। कवि एक पल के लिए भी श्री कृष्ण से अपनी मन विमुख नही कर पाता है।
(ख) रसखानि कबौ इन आँखिन सौ बज्र के बनबाग तड़ाग निहारौ।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तिक गोधूली, भाग-2 के काव्यखण्ड के कविता " करिल के कुंजन ऊपर बारौ" से लिया गया है। जिसके लेखक रसखान जी है।
प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि कहना, चाहता है कि वह भगवान की भक्ति और दर्शन प्राप्त करने के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार है। कवि कहते है कि आपका भक्त रसखान, आपके दर्शन हेतु कब से वज्र के वन वाग और तराग की नजरें टिकाएँ बैठा है।

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